हिमाचल प्रदेश कैबिनेट उप-समिति का SDRF उत्तराखंड मुख्यालय भ्रमण, आपदा प्रबंधन में समन्वय पर जोर

देहरादून



हिमाचल प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट उप-समिति द्वारा उत्तराखंड राज्य के आधिकारिक भ्रमण के दौरान एसडीआरएफ परिसर, जॉली ग्रांट का दौरा किया गया। इस अवसर पर सेनानायक SDRF  अर्पण यदुवंशी द्वारा प्रतिनिधिमंडल को SDRF की संरचना, संगठनात्मक कार्यप्रणाली तथा राज्य में आपदा प्रबंधन हेतु किए जा रहे समन्वित प्रयासों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

भ्रमण के दौरान सेनानायक  अर्पण यदुवंशी द्वारा प्रतिनिधिमंडल को SDRF की त्वरित रिस्पॉन्स प्रणाली, अत्याधुनिक बचाव उपकरणों के उपयोग तथा चारधाम यात्रा एवं अन्य प्रमुख आपदा/बचाव अभियानों में SDRF की भूमिका एवं अनुभवों से अवगत कराया गया। हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड की समान भौगोलिक परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए, आपदा के समय प्रभावी कार्रवाई, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा रिस्पॉन्स टाइम मैनेजमेंट पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने SDRF द्वारा उपयोग में लाए जा रहे आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा पर्वतीय क्षेत्रों में संचालित जटिल रेस्क्यू ऑपरेशनों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। साथ ही, प्रतिनिधिमंडल द्वारा SDRF की प्रशिक्षण शाखा का भी अवलोकन किया गया, जिसमें आपदा प्रबंधन से संबंधित विभिन्न विषयों पर दिए जा रहे प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकों पर आधारित मॉड्यूल्स एवं प्रशिक्षकों की विशेषज्ञता के बारे में विस्तार से जानकारी ली गई।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने SDRF उत्तराखंड की तत्परता, दक्षता एवं उत्कृष्ट कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि बल द्वारा उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए अत्यंत त्वरित एवं पेशेवर राहत एवं बचाव कार्य संपादित किए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में SDRF की कार्यक्षमता, समन्वय क्षमता तथा तकनीकी दक्षता की प्रशंसा की और इसे अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणादायक एवं अनुकरणीय मॉडल बताया।

भ्रमण के दौरान इस अवसर पर उपसेनानायक  शुभांक रतूड़ी, शशांतनु पाराशर, प्रभारी निरीक्षक (प्रशिक्षण)  प्रमोद रावत तथा वाहिनी के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

यह भ्रमण दोनों राज्यों के मध्य आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अनुभवों के आदान-प्रदान, रणनीतिक सहयोग तथा भविष्य में बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

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